उपनिवेशवाद और जनजातीय समाज

उपनिवेशवाद और जनजातीय समाज: होलो दोस्तों इस आर्टिकल में आप जानोगे कि उपनिवेशवाद और जनजातीय समाज क्या है| इस लेख को अछे तरीको से पढना | जिससे आपको सारी चीजे डिटेल में समाज आ जाए |

जनजातीय समाज और उनकी अर्थव्यवस्था

उपनिवेशवाद और जनजातीय समाज: जनजातियों के समुदाय भारतीय जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा है। देश की बड़ी जनसंख्या इन राज्यों में रहती हैं जैसे उत्तर प्रदेश उड़ीसा बिहार महाराष्ट्र गुजरात और राजस्थान। वे छोटे राज्यों में भी व्यवस्थित हैं जैसे गोवा दादरा और नागर हवेली लक्ष्यदीप सिक्किम मिजोरम नागालैंड और मेघालय इत्यादि। सबसे बड़ी आदिवासी जनसंख्या गोंडा भील संथाल मीजो और ओरेओन है।
कुछ जनजातियां जंगल का परवर्ती स्थानों में रहती हैं तो कुछ अन्य ग्रामीण और शहरी इलाकों में जा बसी हैं। वे छोटे घरों में रहते हैं जिन में एक या दो कमरे होते हैं । पेड़ों से घिरे स्थानों पर या झंडू में दो या चार विपरीत कतारों में बनी झोपड़ियों में रहते हैं उनके घर पत्थर से बने होते हैं या फर्श पर मिट्टी का लेप होता है| दीवारें मिट्टी की और छत छपरा से बनी होते हैं। वे भेड़ बकरी जैसे पशु को पालते हैं| वह अपनी मूल आवश्यकताओं की पूर्ति साप्ताहिक बाजारो से और छोटे व्यापारिक कृतियों से करते हैं। वे कई प्रकार के आर्थिक कार्यों में लिप्त रहते हैं जैसे शिकार मछली पकड़ना पशुपालन मधुमक्खी पालन।

उपनिवेशवाद और जनजातीय समाज: घरेलू आर्थिक और सांस्कृतिक कार्यों में स्त्रियों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। वर्धन की लकड़ी इकट्ठा करती हैं पानी लाती हैं और घर की सफाई कपड़ों की धुलाई आदि करती हैं। इसके अतिरिक्त वे कृषि कार्य भी करती हैं।

पुरुष वनों की कटाई कृषि के लिए भूमि को उपयुक्त करना और भूमि को जोतने का कार्य करते हैं। जिस पुरुष का अस्तर उच्च होता है| वह दो पत्नियां लगता है।
जल विद्युत उत्पादन की परियोजनाओं चरण के और रेल मार्ग बिछाने पहाड़ी स्थलों से खनिजों के दोहन से आदिवासियों पर स्रोतों की अनिश्चितता और दुख छा गए हैं। वर्तमान समय में भी उनकी दशा सुधारने के लिए कोई भी कार्य नहीं किया गया वह अभी भी दुर्भाग्य और रोगों के संजाल में उलझे हैं।

उत्तर पूर्वी भाग में जनजातीय विद्रोह

उपनिवेशवाद और जनजातीय समाज: प्रथम जनजातीय विद्रोह क्यों द्वारा देश के उत्तर पूर्वी भागों में हुआ था। खांसी एक महत्वपूर्ण जनजाति थी जो पूर्व में जितिया पर्वतों और पश्चिम में गोरा पर्वतों पर रहती थी। वे शक्तिशाली थे। खांसी ओके सरदार तीरथ सिंह नोखड़ा अपने प्रदेश से अजनबियों को बाहर करना चाहता था।

उसने आतंक यूरोपियों और बंगालियों को मार डाला। उन्होंने यूरोपियन केंद्रों को जला डाला बंधुओं को मुक्त कर दिया और आदमियों के राजनीतिक दलाल स्कॉट की तलाश में चेरापूंजी की ओर प्रस्थान किया। तीरथ सिंह ने अन्य जनजातियों जैसे झूठ और सिंह की मदद अंग्रेजों को भगाने के लिए ली।

उन्होंने अंग्रेज अधिकारियों के मध्य बहुत भय उत्पन्न किया। इसलिए अंग्रेज अधिकारी आंसुओं के वृद्ध हो गए और एक के बाद दूसरा खातेगांव जलाने लगे। अंत में 1833 में तीरथ सिंह ने आत्मसमर्पण कर दिया।
जब अंग्रेज खुशियों के वृद्ध युद्ध में उलझे थे एक अन्य पर्वतीय जनजाति सिंह तो ने विद्रोह कर दिया।

उपनिवेशवाद और जनजातीय समाज: इसी खासियत की मदद मिली। अब खासी संगठित अंग्रेजों के विरुद्ध खड़े हुए इन दो जनजातियों ने असंतुष्ट असमिया कुलीन वर्ग की अपनी स्वतंत्रता के लिए लड़ने का एक अन्य अवसर दिया। वे सभी एक हो गए और एक कुमार रूपचंद्र को अंग्रेजों के विरुद्ध अपना राजा चुन लिया।

उन्होंने आसाम में डेरा डाले अंग्रेजों पर धावा बोल दिया और बड़ी संख्या में सैनिकों को मार डाला परंतु अंत में उन्हें उनके उन्नत सेन शास्त्रों के समक्ष आत्मसमर्पण करना पड़ा। परंतु उनका क्रोध अभी शांत नहीं हुआ था सिंह तो लड़ाके अभी भी प्रतिशोध लेना चाहते थे और उन्होंने 1839 में पुनः अंग्रेजों के विरुद्ध युद्ध छेड़ दिया और कर्नल को मार डाला।

एक अन्य उत्तर पूर्वी जनजाति नागर ने विद्रोह किया और दीमापुर पुलिस के मुखिया को 1844 में मार डाला। इससे अंग्रेजी सेना ही विचलित हो गई स्थित को संभालने में 3 वर्ष का समय लगा।
को क्यों ने 1826 1844 और फिर 1849 में विद्रोह किया । विमल पुर के पर्वतीय स्थलों के निवासी थे।

छोटानागपुर क्षेत्र में विद्रोह

उपनिवेशवाद और जनजातीय समाज: सबसे अधिक तीव्र और आध्यात्मिक जनजातीय विद्रोह छोटानागपुर बंगाल बिहार और उड़ीसा में हुआ। प्रथम विद्रोह गोलू का था जो 1820 में हुआ। 3 वर्ष बाद ही मुंडो ने 1830 से 1831 में छोटानागपुर क्षेत्र में विद्रोह कर दिया। इस विद्रोह का परिणाम राज्य का नया नियम था |

जो बाहरी लोगों को देना पड़ता था और सरकार में न्यायिक व राज्य से नियंत्रण भी आरंभ हुआ। सिगिरिया विद्रोह बड़े क्षेत्र में फैल गया जिसमें हजारीबाग प्लान सिंहभूम प्रमुख थे। हजारों लोग जला दिए गए और मारे गए। उन्हें संभालना एक कठिन कार्य था।
बुध भगत जैसे नेता लड़ी और अंत में आत्मसमर्पण किया। लंबे सैन्य अभियान के बाद विद्रोह को शांत किया जा सका। जनजातियों ने छोटानागपुर क्षेत्र में बड़ा भूभाग पा लिया । उन्हें भय था कि अंग्रेज उनकी भूख ले लेंगे बुद्धा मजदूर बना लेंगे और भारी कर लगा देंगे। उन्होंने 1876 में विद्रोह किया और कप्तान मैक पर्सन के शिविर पर हमला करके उन्हें आत्मसमर्पण के लिए विवश कर दिया।

उपनिवेशवाद और जनजातीय समाज: दूसरी जनजातियों ने भी 3 वर्षों तक उनका साथ दिया अंग्रेजों ने बुद्धिमानी से कार्य किया और उन्हें दबा दिया उन्होंने खंडों के नेता को बुलाकर उसे उनका मुखिया बना दिया । इससे खून शांत हो गया संथाल विद्रोह अट्ठारह सौ 55 से 56 में छोटा गांव नागपुर क्षेत्र में हुआ या विद्रोह जमीदारों महाजनों और अंग्रेज अधिकारियों के दमन के विरुद्ध था।

सिद्धू और काम हूं भाइयों ने भागलपुर और राजमहल के मध्य रेलवे संचार ध्वस्त कर दिया। वेब पूर्ण नियंत्रण में थे। उन्होंने तलवारों और विषैले तीरों से यूरोपियों और बंगालियों पर हमला किया और अनेकों रेलवे कर्मचारियों और पुलिस वालों को मार डाला। अंग्रेजों के विरुद्ध या 1 युद्ध 1856 तक चला अंग्रेज उनके विरुद्ध लगातार हमले करते रहने पर विवश हो गए। उन पर अत्यंत अमानवीय अत्याचारों का सिलसिला चला।

बिरसा मुंडा

उपनिवेशवाद और जनजातीय समाज: बिरसा मुंडा का जन्म छोटानागपुर क्षेत्र में अट्ठारह सौ सत्तावन ईसवी को हुआ था। आदिवासियों के विदेशी सरकार से मुक्ति पाने के तीव्र संघर्ष के उपरांत ही जमींदार अट्ठारह सौ सत्तावन तक उनका उत्पीड़न करते रहे। 21 वर्ष की आयु में बिरसा मुंडा ने 18 सो 95 में एक नया विश्वास जारी किया।
शुद्धता के हिंदू विचार ने उसे बहुत प्रभावित किया। उसके विश्वास के कारण उसके असंग फिर से बने और जल्दी ही व ईश्वर के नए अवतार के रूप में प्रकट हुआ जिसमें अलौकिक शक्तियां थी। उसका गांव हजारों मुंडो का तीर्थ बन गया। बिरसा मुंडा की इस प्रसिद्धि से अंग्रेज प्रसन्ना ही थे और वह चिंता तो रूठे इसलिए उन्होंने मुंडा को पकड़ने का निर्णय ले लिया|

उपनिवेशवाद और जनजातीय समाज: परंतु बिरसा मुंडा को दिन के समय पकड़ना इतना सरल ना था क्योंकि उसके पीछे बहुत लोग थे। अगस्त 24 अट्ठारह सौ 95 को जब बिरसा मुंडा सोया हुआ था अंग्रेजों ने उसे पकड़ लिया और किसी के विरुद्ध करने से पूर्व भी उसे रांची ले गए। शीघ्र ही जनवरी 18 से 96 को लोगों के प्रतिरोध के कारण उसे मुक्त कर दिया गया। अकाल कमी और महावारी के विभीषिका के लोगों की सहानुभूति पाने में मदद की।


उपनिवेशवाद और जनजातीय समाज: उपनिवेश के तंत्रों ने स्थित को और अधिक गंभीर कर दिया। जनजाति लोक गैर जनजातीय लोगों वाले करो को सहन नहीं कर पाए इन करो ने ही उन्हें विश्वास कर दिया कि वे विद्रोह करें और अपनी भूमि को गैर जनजातीय सरदारों और अंग्रेजों से मुक्त कराएं। बिरसा मुंडा ने उन्हें पूरा समर्थन दिया उसने एक सेना की आवश्यकता महसूस की । उन्होंने जनजातीय लोगों को बहुत हीरो और तलवारों का प्रयोग सिखाया।

उपनिवेशवाद और जनजातीय समाज: शीघ्र ही छोटानागपुर क्षेत्र में अनेक प्रशिक्षण केंद्र खुल गए। बिरसा मुंडा ने कई गुप्त सभाओं को संबोधित किया और लोगों को अन्याय ना सहने के लिए प्रेरित किया क्रिसमस के अवसर पर 18 सो 99 में जोरदार विद्रोह करने की योजना बनी उपदेश से उन क्षेत्रों में हिंसा भड़क उठी और उसके समर्थन ने अंग्रेजों ठिकानों में जमींदार के घरों और पुलिस थानों पर आक्रमण करने का आरंभ कर दिया।

जनवरी में 300 मुंडा ने एक पुलिस थाने पर संगठित आक्रमण किया और कुछ कांस्टेबलों को मार। प्रतिरोध में डिप्टी कमिश्नर ने विरोधियों का पीछा किया। उनमें से कुछ तो जंगल भाग गए कुछ मारे गए और कुछ गिरफ्तार कर लिए गए।

उपनिवेशवाद और जनजातीय समाज: बिरसा मुंडा को पकड़ने के लिए बड़ा अभियान चला अभियान की कुछ दिन बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया और जेल में डाल दिया गया जहां पर वह है जिसे 2 जून उन्नीस सौ को मार गया । इस प्रकार से एक अन्य देशभक्त का अंत हो गया जिसने लोगों को दमनकारी विदेशी साम्राज्यवाद के विरुद्ध संगठित करने का प्रयास किया था

पुनरावृति

  • घरेलू आर्थिक और सांस्कृतिक कार्य में स्त्रियों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है | वह धन की लकड़ी एकत्रित करती हैं, पानी लाती हैं, और घरों की सफाई कपड़ों की धुलाई आदि करती हैं | इसके अतिरिक्त विकृति कार्य भी करती हैं प्रथम जनजातीय विद्रोह हाथियों द्वारा देश के उत्तर पूर्वी भागों में हुआ था |
  • खांसी एक महत्वपूर्ण जनजाति थी | जो पूर्व में जितिया पर्वतों और पश्चिम में गारो पर्वत ऊपर रहती थी | जब अंग्रेज खातों के विरुद्ध युद्ध में उचित है एक अन्य पर्वतीय जनजाति सिंधु ने विद्रोह कर दिया इससे खामोशियों को मदद मिली |
  • सबसे अधिक तीव्र और आध्यात्मिक जनजातीय विद्रोह छोटा नागपुर बंगाल बिहार और उड़ीसा में हुआ |
  • बिरसा मुंडा का जन्म छोटानागपुर क्षेत्र में अट्ठारह सौ सत्तावन ईसवी को हुआ आदिवासियों के विदेशी सरकार से मुक्त पानी के तीव्र संघर्ष के उपरांत थी जमींदार 1857 तक उनका उत्पीड़न करते रहे 1 वर्ष की आयु में बिरसा मुंडा ने 1895 में एक नया विश्वास जारी किया |

आज आपने क्या सीखा?

आज के इस आर्टिकल में आपने उपनिवेशवाद और जनजातीय समाज के टॉपिक को पढ़ा और समझा | हमें उम्मीद है कि आपको ये आर्टिकल पढने में बहुत बढ़िया लगा होगा |

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