शिल्प कला और कुटीर उद्योग

आज के इस आर्टिकल में आप शिल्प कला और कुटीर उद्योग बारे में जानोगे और इसकी कहानी मैंने पूरी विस्तार से बताई हुई है तो इस आर्टिकल को इसलिए को पूरा जरूर पड़ेगा तभी आपको इसकी स्टोरी के बारे में पूरी तरह से समझ में आ जाएगा |

ब्रिटिश साम्राज्यवाद में भारत का सामाजिक और आर्थिक ताना-बाना पूरी तरह से तोड़ दिया | अंग्रेजों द्वारा विकास के आधुनिक और यांत्रिक उत्पादन से पूर्व देश में कुटीर उद्योग फल फूल रहा था। शिल्पा कार जैसे जुलाहे बड़े ही कुमार इत्यादि इन उद्योगों को लोगों को विभिन्न मार्गो को पूर्ण करने में समर्थ किया। विखंडन कई प्रकार के उपकरण और सामान्य उपयोग के घरेलू बर्तन छोटे स्तर पर बनाते थे।

वह लंबे समय से पारिवारिक धंधा सीखते चले आ रहे थे। स्थानीय शासक कोलीन और जमीदार इन्हें विलासिता का सामान बनाने के लिए संरक्षण देते थे। भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी के आगमन के साथ ही सब कुछ बदलने लगा अंग्रेजों ने धीरे-धीरे भारतीय हस्तकला को समाप्त कर दिया।

शिल्प कला और कुटीर उद्योग: अंग्रेजी ईस्ट इंडिया कंपनी केवल भारतीय वस्त्र उद्योग और आचार का व्यापार करती थी। उस समय भारतीय सामान की बहुत मांग थी। इस कारण से अंग्रेजी ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारतीय कामगारों पर दबाव बढ़ाया की वे उनकी कीमतों पर माल बेचे अक्सर सिर्फ कारों को विवश किया जाता था कि वेब पेशगी लें ।

ताकि वे किसी अन्य यूरोपियन कंपनी का काम ना कर सके। ऐसे बढ़ते दबाव में कंपनी को झुकाने वाली युक्तियों से सिर्फ आकारों को अपना परंपरागत सिर्फ छोड़ना पड़ा।


भारतीय सामान की बढ़ती लोकप्रियता से अंग्रेजी सामान को बड़ी चुनौती मिली जो अंग्रेज व्यापारियों के लिए बड़ी चिंता का कारण बन गया । इसलिए अंग्रेजी सरकार ने भारतीय सामान की आवक घटाने के लिए उस पर भारी शुल्क लगा दिया। यह भारतीय हस्तकला के लिए बड़े झटके के समान था।

शिल्प कला और कुटीर उद्योग


औद्योगिक क्रांति के कारण अंग्रेजी वस्तुओं की गुणवत्ता में सुधार आया। तब तक ऐसे व्यापारी जिनका ईस्ट इंडिया कंपनी में कोई हिस्सा ना था। यह भारतीय व्यापारियों से व्यापार कर सकते थे।

इस प्रकार से भारतीय हस्तकला को यांत्रिक रीत से बनी सामान की असामान्य प्रतिस्पर्धा से जुड़ना पड़ा। इसके अतिरिक्त बंगाल में अंग्रेजी वस्तुओं पर कोई कर भी ना था। वह खुरदरी हाथ से बनी भारतीय सामान की तुलना में कहीं कम दाम पर बिकती थी और फिर शासक कुलीन जमादार आदि जो सिर्फ कारों को संरक्षण देते थे ना भी अपनी आंखों दी और शिल्पकार संरक्षण ही हो गया।


भारतीय हस्तकला के पतन ने भारतीय उपभोक्ता को अंग्रेजी वस्तुओं का उपभोक्ता बना दिया। औद्योगिक क्रांति के बाद अंग्रेजी कारखानों ने हजारों सिर्फ कारों को काम दिया जो गांव में काम करते रहते थे। दुर्भाग्य से भारत में ऐसे कारखाने ना थे। जो हजारों सिर्फ कारों को काम दे सके। इस प्रकार से भारत का औद्योगिक करण हुआ।

Also read: उपनिवेशवाद और जनजातीय समाज

शिल्प कला और कुटीर उद्योग: 19वीं शताब्दी के अर्धशतक में भारतीय उद्योग उठा परंतु इसकी रफ्तार धीमी थी। इस कारण था कि अंग्रेजों ने चाहा था कि भारत उनका उपनिवेश ही है। जिस के दोहन से वे ब्रिटेन को धनी करते रहे। परंतु औद्योगिक क्रांति की धमक भारत में पहुंची। इसके अतिरिक्त अंग्रेजों ने कृषि उद्योग का विकास केवल उनके अपने व्यापार के लिए किया। खाद्य फसलों के स्थान पर नील चाय काफी झूठ रबड़ सिनकोना गन्ना और तेल के बीजों की फसलें बड़ी मात्रा में उगाई जाती थी।

भारतीय हस्तकला की पीढ़ी


नील उन अत्यंत महत्वपूर्ण फसलों में से एक थी जो बंगाल में उगाई जाती थी इससे कपड़े रंगे जाते थे। अन्य महत्वपूर्ण फसल थी आसाम बंगाल और दक्षिण में उगने वाली चाय भारत की अन्य महत्वपूर्ण फैसले तक काफी रबड़ और सिनकोना।

आधुनिक औद्योगिक क्रांति


शिल्प कला और कुटीर उद्योग: अंग्रेजों ने 19वीं शताब्दी के अर्धशतक में मशीन आधारित उद्योगों की स्थापना की। इसने भारतीय उद्योग का नक्शा ही बदल दिया। सूत जूट कोयला लोहा गन्ना और सीमेंट के महत्वपूर्ण उद्योग थे । जो इसी अवधि में विकसित हुए। बंगाल स्थित जूट उद्योग बड़ी तेजी से बड़ा फिर शताब्दी के मध्य के बाद से कोयला उद्योग ने रफ्तार पकड़ी बिहार बंगाल और उड़ीसा की खानों ने रेलवे और अन्य उद्योगों के लिए कोयले की आपूर्ति की बाद में लोहा और इस्पात उद्योग विकसित हुआ।

जमशेदजी टाटा ने प्रत्येक टाटा आयरन एंड स्टील टिस्को की स्थापना जमशेदपुर में की जिससे विकास बड़ी तेजी से हुआ । इसके तुरंत बाद बंगाल और मैसूर में लोहे और स्टील के और अधिक कारखाने लगाए गए लोहा और इस्पात उद्योग ने इंजीनियरिंग उत्पादों की विधि में तेजी से मदद की।

Also read: व्यापार से साम्राज्य तक
शिल्प कला और कुटीर उद्योग: 1930 में चीनी उद्योग ने तीव्र विकास देखा जिसमें अधिकतर भारतीयों की भागीदारी थी। इसी समय में सीमेंट और अन्य उद्योग में भी तेजी आई बड़े पैमाने में देखा जाए तो अंग्रेजों के समय में औद्योगिक वृद्धि बहुत मंद और अस्त व्यस्त रहे अंग्रेजों ने भारतीय विकास को ठप करने की योजना बनाई।


अंग्रेजों ने विदेशी सामान पर आयात शुल्क में कमी कर दी देसी सामान मशीनी सामान के साथ कड़ी प्रतिस्पर्धा में आ गया । भारत में अंग्रेजों ने उद्योगों पर अधिकार कर रखा था । जिसे प्राप्त लाभ से वह अपने देश विकसित करने में लगे थे। उस संपत्ति से भारतीय उद्योग का कुछ भला ना हुआ। संपूर्ण धन धीरे-धीरे भारत से बाहर जा रहा था।


शिल्प कला और कुटीर उद्योग: दादा भाई नौरोजी जो एक प्रमुख राष्ट्रवादी थे ने अपनी पुस्तक अंग्रेजी शासक और भारत की गरीबी में लिखा है अंग्रेजी शासन में देश की संपत्ति निरंतर बाहर जा रही थी भारत से एकत्रित राजस्व का बड़ा भाग अंग्रेज अधिकारियों के ग्रह शुल्क वेतन पेंशन और बचत के रूप में भेजा जाता था । भारतीय जनता की आर्थिक स्थिति अत्यंत सोचनीय थी । भारत के प्रति व्यक्ति आय संचार में सबसे कम थी जिनके पास धन था और अभावग्रस्त के मध्य में खाई बहुत चौड़ी थी।


जमीदार कारखानों के स्वामी और व्यापारी अत्यंत समृद्ध थे जबकि किसानों सेल्फ कारों ने आधुनिक उद्योग के आने और कड़ी प्रतिस्पर्धा के कारण अपनी जीविका को दी थी।  किसानों पर अत्यधिक कर था। कारखानों के मजदूरों को पगार बहुत कम दी जाती थी । उन्हें गरीब की हालत में अधिक समय तक कार्य करना होता था।

भारतीय वस्त्र उद्योग का अध्ययन

शिल्प कला और कुटीर उद्योग: वस्त्र उद्योग भारतीय निर्यात के इतिहास में बड़े भाग का निर्माण करता है। इस के पुरातात्विक प्रमाण है कि द्वितीय सहस्राब्दी में मोहनजोदड़ो की रंगों का प्रयोग किया जाता था । मार्कोपोलो ने लिखा है कि भारतीय वस्त्र उद्योग आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु से चीन और दक्षिण पूर्वी एशिया में निर्माण करता था । बुध के लेख भी दर्शाते हैं कि उन्हीं का लीनो का भारत में 500 ईसवी पूर्व में प्रयोग होता था। भारत में कालीन ओं का निर्माण मुगल अवधि में भी होता था जो आज भी कीमती है।


शिल्प कला और कुटीर उद्योग: इसलिए इन तथ्यों से स्पष्ट है कि प्राचीन काल से ही भारत का वस्त्र उद्योग विकसित था । जिसकी तकनीक विश्वस्तरीय थी उपनिवेश से पहले भारत की हस्त चलित वस्त्र निर्माण की मशीनें अत्यंत उन्नति प्राकृतिक स्रोत जैसे सिल्क सूट और झूठ भारत के विभिन्न भागों जयते ढाका मुर्शिदाबाद बनारस लखनऊ उत्तर में उपलब्ध थे जो प्रमुख भारतीय वस्त्र निर्माण केंद्र थे।


भारतीय वस्त्र उद्योग का गौरवशाली भाग उपनिवेश द्वारा दरकिनार कर दिया गया। अंग्रेज इस तथ्य को जानते थे कि वह भारतीय वस्त्र उद्योग का सामना गुणवत्ता में नहीं कर सकते। 1880 के अंत तक भारतीय वस्त्र उद्योग को नष्ट कर दिया गया और घरेलू बाजार पर अंग्रेजी उत्पादकों का कब्जा हो गया । घरेलू बाजार में अंग्रेजी उत्पादक की सरल प्रवेश के लिए शुल्क कम कर दिए गए और अंग्रेजी बाजारों से भारतीय उत्पाद बाहर ही रखे गए। शिल्प कला और कुटीर उद्योग | शिल्प कला और कुटीर उद्योग

पुनरावृति

  • अंग्रेजी ईस्ट इंडिया कंपनी केवल भारतीय वस्त्र उद्योग और आचार्य का व्यापार करती थी । उस समय भारतीय सामान की बहुत मांग थी ।
  • भारतीय हस्तकला के पतन ने भारतीय उपभोक्ता को अंग्रेजी वस्तुओं का उपभोक्ता बना दिया। औद्योगिक क्रांति के बाद अंग्रेजी कारखानों ने हजारों सिर्फ कारों को काम दिया जो गांव में काम करते रहे थे।
  • 19वीं शताब्दी के अर्धशतक में भारतीय उद्योग उठा परंतु इसकी रफ्तार धीमी थी। इसका कारण था कि अंग्रेजों ने चाहा था कि भारत उन का उपनिवेश ही रहे जिसके दोहन से वे ब्रिटिश को धनी करते रहे।
  • अंग्रेजों नहीं बनने से शताब्दी के अर्थ शतक में मशीन आधारित उद्योगों की स्थापना की इसमें भारतीय उद्योग का नक्शा ही बदल दिया। सूत यूथ कोयला लोहा गन्ना और सीमेंट के महत्वपूर्ण उद्योग थे जो इसी अवधि में विकसित हुए।
  • 1930 में चीनी उद्योग ने तीव्र विकास देखा जिसमें अधिकतर भारतीयों की भागीदारी थी । इसी समय में सीमेंट और अन्य उद्योग में भी तेजी आई । परंतु बड़े पैमाने पर देखा जाए तो अंग्रेजों के समय में औद्योगिक क्रांति यानी कि औद्योगिक वृद्धि बहुत मंद और अस्त व्यस्त रही।
  • जमीदार कारखानों के स्वामी और व्यापारी अत्यंत समृद्ध थे। जबकि किसानों सिर्फ कारों ने आधुनिक उद्योगों को आने और कड़ी प्रतिस्पर्धा के कारण अपनी जीविका को दी थी। 

आज आपने क्या सीखा?

आज के इस आर्टिकल में आपने शिल्प कला और कुटीर उद्योग के टॉपिक को पढ़ा और समझा | हमें उम्मीद है कि आपको ये आर्टिकल पढने में बहुत बढ़िया लगा होगा |

अगर आपको शिल्प कला और कुटीर उद्योग टॉपिक अच्छा लगा हो तो इस आर्टिकल को शेयर करना मत भूलियेगा | साथ ही आगे ऐसे ही आर्टिकल पढने के लिए इस ब्लॉग को suscribe कर लीजिये |

Editorial Staff
Editorial Staffhttps://techjugut.com
We like to share information related to science, technology and many thinks related to the Internet. You can Follow us on Facebook, Twitter and Instagram to get latest updates on trending topics!

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here